वाल्मीकि रामायण 1.8.4
ततोऽब्रवीत् महातेजाः सुमंत्रम् मंत्रि सत्तमम् ।शीघ्रम् आनय मे सर्वान् गुरून् तान् स पुरोहितान्॥
tato'bravīt mahātejāḥ sumaṃtram maṃtri sattamam |śīghram ānaya me sarvān gurūn tān sa purohitān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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