वाल्मीकि रामायण 1.8.7
तान् पूजयित्वा धर्मात्मा राजा दशरथः तदा ।इदम् धर्म अर्थ सहितम् श्लक्ष्णम् वचनम् अब्रवीत्॥
tān pūjayitvā dharmātmā rājā daśarathaḥ tadā |idam dharma artha sahitam ślakṣṇam vacanam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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