वाल्मीकि रामायण 1.9.14
तेषाम् तु वचनम् श्रुत्वा राजा चिन्ताम् प्रपत्स्यते ।केन उपायेन वै शक्यम् इह आनेतुम् स वीर्यवान्॥
teṣām tu vacanam śrutvā rājā cintām prapatsyate |kena upāyena vai śakyam iha ānetum sa vīryavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें