वाल्मीकि रामायण 2.1.22
धर्मकामार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान् ।लौकिके समयाचारे कृतकल्पो विशारदः॥
dharmakāmārthatattvajñaḥ smṛtimān pratibhānavān |laukike samayācāre kṛtakalpo viśāradaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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