वाल्मीकि रामायण 2.1.9
स हि रूपोपपन्नश्च वीर्यवाननसूयकः ।भूमावनुपमः सूनुर्गणैर्धशरथोपमः॥
sa hi rūpopapannaśca vīryavānanasūyakaḥ |bhūmāvanupamaḥ sūnurgaṇairdhaśarathopamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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