वाल्मीकि रामायण 2.100.28
कच्चिन्नोग्रेण दण्डेन भृशमुद्वेजितप्रजम् ।राष्ट्रं तवानुजानन्ति मन्त्रिण: कैकयीसुत॥
kaccinnogreṇa daṇḍena bhṛśamudvejitaprajam |rāṣṭraṃ tavānujānanti mantriṇa: kaikayīsuta ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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