वाल्मीकि रामायण 2.100.33
कच्चिद्बलस्य भक्तं च वेतनं च यथोचितम् ।सम्प्राप्तकालं दातव्यं ददासि न विलम्बसे॥
kaccidbalasya bhaktaṃ ca vetanaṃ ca yathocitam |samprāptakālaṃ dātavyaṃ dadāsi na vilambase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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