वाल्मीकि रामायण 2.100.35
कच्चित् सर्वे ऽनुरक्तास्त्वां कुलपुत्रा: प्रधानत: ।कच्चित्प्राणांस्तवार्थेषु सन्त्यजन्ति समाहिता:॥
kaccit sarve 'nuraktāstvāṃ kulaputrā: pradhānata: |kaccitprāṇāṃstavārtheṣu santyajanti samāhitā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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