वाल्मीकि रामायण 2.100.46
अदेवमातृको रम्य: श्वापदै: परिवर्जित: ।परित्यक्तो भयै: सर्वै: खनिभिश्चोपशोभित:॥
adevamātṛko ramya: śvāpadai: parivarjita: |parityakto bhayai: sarvai: khanibhiścopaśobhita: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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