वाल्मीकि रामायण 2.100.53
कच्चिन्न सर्वे कर्मान्ता: प्रत्यक्षास्ते ऽविशङ्कया ।सर्वे वा पुनरुत्सृष्टा मध्यमेवात्र कारणम्॥
kaccinna sarve karmāntā: pratyakṣāste 'viśaṅkayā |sarve vā punarutsṛṣṭā madhyamevātra kāraṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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