वाल्मीकि रामायण 2.100.64
कच्चिदर्थं च धर्मं च कामं च जयतां वर ।विभज्य काले कालज्ञ सर्वान् वरद सेवसे॥
kaccidarthaṃ ca dharmaṃ ca kāmaṃ ca jayatāṃ vara |vibhajya kāle kālajña sarvān varada sevase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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