वाल्मीकि रामायण 2.100.69
दश पञ्च चतुर्वर्गान् सप्तवर्गं च तत्त्वत: ।अष्टवर्गं त्रिवर्गं च विद्यास्तिस्रश्च राघव॥
daśa pañca caturvargān saptavargaṃ ca tattvata: |aṣṭavargaṃ trivargaṃ ca vidyāstisraśca rāghava ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें