वाल्मीकि रामायण 2.100.6
कच्चिद्धारयते तात राजा यत्त्वमिहागत: ।कच्चिन्न दीन: सहसा राजा लोकान्तरं गत:॥
kacciddhārayate tāta rājā yattvamihāgata: |kaccinna dīna: sahasā rājā lokāntaraṃ gata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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