वाल्मीकि रामायण 2.100.9
कच्चिद्दशरथो राजा कुशली सत्यसङ्गर: ।राजसूयाश्वमेधानामाहर्त्ता धर्मनिश्चय:॥
kacciddaśaratho rājā kuśalī satyasaṅgara: |rājasūyāśvamedhānāmāharttā dharmaniścaya: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें