वाल्मीकि रामायण 2.101.2
शाश्वतो ऽयं सदा धर्म्म: स्थितो ऽस्मासु नरर्षभ ।ज्येष्ठपुत्रे स्थिते राजन्न कनीयान् नृपो भवेत्॥
śāśvato 'yaṃ sadā dharmma: sthito 'smāsu nararṣabha |jyeṣṭhaputre sthite rājanna kanīyān nṛpo bhavet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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