वाल्मीकि रामायण 2.101.3
स समृद्धां मया सार्द्धमयोध्यां गच्छ राघव ।अभिषेचय चात्मानं कुलस्यास्य भवाय न:॥
sa samṛddhāṃ mayā sārddhamayodhyāṃ gaccha rāghava |abhiṣecaya cātmānaṃ kulasyāsya bhavāya na: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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