वाल्मीकि रामायण 2.101.4
राजानं मानुषं प्राहुर्देवत्वे स मतो मम ।यस्य धर्मार्थसहितं वृत्तमाहुरमानुषम्॥
rājānaṃ mānuṣaṃ prāhurdevatve sa mato mama |yasya dharmārthasahitaṃ vṛttamāhuramānuṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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