वाल्मीकि रामायण 2.102.1
तां श्रुत्वा करुणां वाचं पितुर्मरणसंहिताम् ।राघवो भरतेनोक्तां बभूव गतचेतन:॥
tāṃ śrutvā karuṇāṃ vācaṃ piturmaraṇasaṃhitām |rāghavo bharatenoktāṃ babhūva gatacetana: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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