वाल्मीकि रामायण 2.102.11
निष्प्रधानामनेकाग्रां नरेन्द्रेण विना कृताम् ।निवृत्तवनवासोपि नायोध्यां गन्तुमुत्सहे॥
niṣpradhānāmanekāgrāṃ narendreṇa vinā kṛtām |nivṛttavanavāsopi nāyodhyāṃ gantumutsahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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