वाल्मीकि रामायण 2.102.15
सीते मृतस्ते श्वशुर: पित्रा हीनो ऽसि लक्ष्मण ।भरतो दु:खमाचष्टे स्वर्गतं पृथिवीपतिम्॥
sīte mṛtaste śvaśura: pitrā hīno 'si lakṣmaṇa |bharato du:khamācaṣṭe svargataṃ pṛthivīpatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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