वाल्मीकि रामायण 2.102.31
ततस्तेनैव मार्गेण प्रत्युत्तीर्य्य नदीतटात् ।आरुरोह नरव्याघ्रो रम्यसानुं महीधरम्॥
tatastenaiva mārgeṇa pratyuttīryya nadītaṭāt |āruroha naravyāghro ramyasānuṃ mahīdharam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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