वाल्मीकि रामायण 2.104.3
किं निमित्तमिमं देशं कृष्णाजिनजटाधर: ।हित्वा राज्यं प्रविष्टस्त्वं तत्सर्वं वक्तुमर्हसि॥
kiṃ nimittamimaṃ deśaṃ kṛṣṇājinajaṭādhara: |hitvā rājyaṃ praviṣṭastvaṃ tatsarvaṃ vaktumarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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