वाल्मीकि रामायण 2.105.10
एषोपमा महाबाहो तमर्थं वेत्तुमर्हसि ।यदि त्वमस्मान् वृषभो भर्त्ता भृत्यान्न शाधि हि॥
eṣopamā mahābāho tamarthaṃ vettumarhasi |yadi tvamasmān vṛṣabho bharttā bhṛtyānna śādhi hi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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