वाल्मीकि रामायण 2.106.12
को हि धर्मार्थयोर्हीनमीदृशं कर्म किल्बिषम् ।स्त्रिया: प्रियं चिकीर्षु: सन् कुर्याद्धर्मज्ञ धर्मवित्॥
ko hi dharmārthayorhīnamīdṛśaṃ karma kilbiṣam |striyā: priyaṃ cikīrṣu: san kuryāddharmajña dharmavit ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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