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वाल्मीकि रामायण 2.106.15
पितुरपतनहेतुत्वात्तदेवापत्यत्वेन सम्मतम्॥
piturapatanahetutvāttadevāpatyatvena sammatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपितुरपतनहेतुत्वात्तदेवापत्यत्वेन सम्मतम्॥
piturapatanahetutvāttadevāpatyatvena sammatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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