वाल्मीकि रामायण 2.106.18
क्व चारण्यं क्व च क्षात्ऺत्र क्व जटा: क्व च पालनम् ।ईदृशं व्याहतं कर्म न भवान् कर्तुमर्हति॥
kva cāraṇyaṃ kva ca kṣātऺtra kva jaṭā: kva ca pālanam |īdṛśaṃ vyāhataṃ karma na bhavān kartumarhati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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