वाल्मीकि रामायण 2.106.25
इदं निखिलमव्यग्रं राज्यं पित्र्यमकण्टकम् ।अनुशाधि स्वधर्मेण धर्मज्ञ सह बान्धवै:॥
idaṃ nikhilamavyagraṃ rājyaṃ pitryamakaṇṭakam |anuśādhi svadharmeṇa dharmajña saha bāndhavai: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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