वाल्मीकि रामायण 2.106.30
आक्रोशं मम मातुश्च प्रमृज्य पुरुषर्षभ ।अद्य तत्रभवन्तं च पितरं रक्ष किल्बिषात्॥
ākrośaṃ mama mātuśca pramṛjya puruṣarṣabha |adya tatrabhavantaṃ ca pitaraṃ rakṣa kilbiṣāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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