वाल्मीकि रामायण 2.106.7
न त्वामेवङ्गुणैर्युक्तं प्रभवाभवकोविदम् ।अविषह्यतमं दु:खमासादयितुमर्हति॥
na tvāmevaṅguṇairyuktaṃ prabhavābhavakovidam |aviṣahyatamaṃ du:khamāsādayitumarhati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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