वाल्मीकि रामायण 2.107.9
भवानपि तथेत्येव पितरं सत्यवादिनम् ।कर्त्तुमर्हति राजेन्द्र क्षिप्रमेवाभिषेचनात्॥
bhavānapi tathetyeva pitaraṃ satyavādinam |karttumarhati rājendra kṣipramevābhiṣecanāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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