वाल्मीकि रामायण 2.109.7
कश्चेतयान: पुरुष: कार्याकार्यविचक्षण: ।बहुमंस्यति मां लोके दुर्वृत्तं लोकदूषणम्॥
kaścetayāna: puruṣa: kāryākāryavicakṣaṇa: |bahumaṃsyati māṃ loke durvṛttaṃ lokadūṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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