वाल्मीकि रामायण 2.110.4
असृजच्च जगत् सर्वं सह पुत्रै: कृतात्मभि: ।आकाशप्रभवो ब्रह्मा शाश्वतो नित्य अव्यय:॥
asṛjacca jagat sarvaṃ saha putrai: kṛtātmabhi: |ākāśaprabhavo brahmā śāśvato nitya avyaya: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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