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वाल्मीकि रामायण 2.110.5
तस्मान्मरीचि: संजज्ञे मरीचे: काश्यप: सुत:॥
tasmānmarīci: saṃjajñe marīce: kāśyapa: suta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतस्मान्मरीचि: संजज्ञे मरीचे: काश्यप: सुत:॥
tasmānmarīci: saṃjajñe marīce: kāśyapa: suta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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