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वाल्मीकि रामायण 2.112.28
इत्युक्त्वा ऽश्रुपरीताक्षो भ्रातरं विससर्ज ऺह॥
ityuktvā 'śruparītākṣo bhrātaraṃ visasarja ऺha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंइत्युक्त्वा ऽश्रुपरीताक्षो भ्रातरं विससर्ज ऺह॥
ityuktvā 'śruparītākṣo bhrātaraṃ visasarja ऺha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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