वाल्मीकि रामायण 2.114.21
भरतस्तु रथस्थ: सन् श्रीमान् दशरथात्मज: ।वाहयन्तं रथश्रेष्ठं सारथिं वाक्यमब्रवीत्॥
bharatastu rathastha: san śrīmān daśarathātmaja: |vāhayantaṃ rathaśreṣṭhaṃ sārathiṃ vākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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