वाल्मीकि रामायण 2.114.7
सफेना सस्वना भूत्वा सागरस्य समुत्थिताम् ।प्रशान्तमारुतोद्घातां जलोर्मिमिव निस्वनाम्॥
saphenā sasvanā bhūtvā sāgarasya samutthitām |praśāntamārutodghātāṃ jalormimiva nisvanām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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