वाल्मीकि रामायण 2.117.16
शिथिलां वलितां वृद्धां जरापाण्डरमूर्द्धजाम् ।सततं वेपमानाङ्गी प्रवाते कदली यथा॥
śithilāṃ valitāṃ vṛddhāṃ jarāpāṇḍaramūrddhajām |satataṃ vepamānāṅgī pravāte kadalī yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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