वाल्मीकि रामायण 2.117.2
इह मे भरतो दृष्टो मातरश्च सनागरा: ।सा च मे स्मृतिरन्वेति तान्नित्यमनुशोचत:॥
iha me bharato dṛṣṭo mātaraśca sanāgarā: |sā ca me smṛtiranveti tānnityamanuśocata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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