वाल्मीकि रामायण 2.117.9
दशवर्षाण्यनावृष्ट्या दग्धे लोके निरन्तरम् ।यया मूलफले सृष्टे जाह्नवी च प्रवर्त्तिता॥
daśavarṣāṇyanāvṛṣṭyā dagdhe loke nirantaram |yayā mūlaphale sṛṣṭe jāhnavī ca pravarttitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें