वाल्मीकि रामायण 2.118.19
मया दत्तमिदं सीते तव गात्राणि शोभयेत् ।अनुरूपमसंक्लिष्टं नित्यमेव भविष्यति॥
mayā dattamidaṃ sīte tava gātrāṇi śobhayet |anurūpamasaṃkliṣṭaṃ nityameva bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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