वाल्मीकि रामायण 2.118.2
नैतदाश्चर्य्यमार्याया यन्मां त्वमनुभाषसे ।विदितं तु ममाप्येतद्यथा नार्य्या: पतिर्गुरु:॥
naitadāścaryyamāryāyā yanmāṃ tvamanubhāṣase |viditaṃ tu mamāpyetadyathā nāryyā: patirguru: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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