वाल्मीकि रामायण 2.118.36
तां धर्षणामदूरस्थां दृष्ट्वा चात्मनि पार्थिव: ।चिन्तार्णवगत: पारं नाससादाप्लवो यथा॥
tāṃ dharṣaṇāmadūrasthāṃ dṛṣṭvā cātmani pārthiva: |cintārṇavagata: pāraṃ nāsasādāplavo yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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