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वाल्मीकि रामायण 2.118.48
ज्यां समारोप्य झटिति पूरयामास वीर्यवत्॥
jyāṃ samāropya jhaṭiti pūrayāmāsa vīryavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंज्यां समारोप्य झटिति पूरयामास वीर्यवत्॥
jyāṃ samāropya jhaṭiti pūrayāmāsa vīryavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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