वाल्मीकि रामायण 2.12.83
यः स्त्रीकृते प्रियम् पुत्रम् वनम् प्रस्थापयिष्यति ।व्रतैश्च ब्रह्मचर्यैश्च गुरुभिश्चपकर्शितः॥
yaḥ strīkṛte priyam putram vanam prasthāpayiṣyati |vrataiśca brahmacaryaiśca gurubhiścapakarśitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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