वाल्मीकि रामायण 2.14.11
एवम् प्रचोदितः राजा कैकेय्या निर्विशन्कया ।न अशकत् पाशम् उन्मोक्तुम् बलिर् इन्द्र क्Rतम् यथा॥
evam pracoditaḥ rājā kaikeyyā nirviśankayā |na aśakat pāśam unmoktum balir indra kRtam yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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