वाल्मीकि रामायण 2.14.25
ततः प्रभातां र्जनीमुदिते च दिवाकरे ।पुण्ये नक्षत्रयोगे चे मुहूर्ते च समाहिते॥
tataḥ prabhātāṃ rjanīmudite ca divākare |puṇye nakṣatrayoge ce muhūrte ca samāhite ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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