वाल्मीकि रामायण 2.16.33
जुगोप भ्रातरम् भ्राता रथम् आस्थाय पृष्ठतः ।ततः हल हला शब्दः तुमुलः समजायत॥
jugopa bhrātaram bhrātā ratham āsthāya pṛṣṭhataḥ |tataḥ hala halā śabdaḥ tumulaḥ samajāyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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