वाल्मीकि रामायण 2.18.33
तत्र मे याचितः राजा भरतस्य अभिषेचनम् ।गमनम् दण्डक अरण्ये तव च अद्य एव राघव॥
tatra me yācitaḥ rājā bharatasya abhiṣecanam |gamanam daṇḍaka araṇye tava ca adya eva rāghava ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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