वाल्मीकि रामायण 2.19.2
एवम् अस्तु गमिष्यामि वनम् वस्तुम् अहम् तु अतः ।जटा चीर धरः राज्ञः प्रतिज्ञाम् अनुपालयन्॥
evam astu gamiṣyāmi vanam vastum aham tu ataḥ |jaṭā cīra dharaḥ rājñaḥ pratijñām anupālayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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