वाल्मीकि रामायण 2.2.13
अनुरूपः स वै नाथो लक्ष्मीवान् लक्ष्मणाग्रजः ।त्रैलोक्यमपि नाथेन येन स्यान्नाथवत्तरम्॥
anurūpaḥ sa vai nātho lakṣmīvān lakṣmaṇāgrajaḥ |trailokyamapi nāthena yena syānnāthavattaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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